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IoB (Internet of Behaviour) क्या है? सम्पूर्ण गाइड

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डिजिटल दुनिया तेज़ी से विकसित हो रही है। पहले इंटरनेट सिर्फ जानकारी पढ़ने का माध्यम था। फिर सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप्स आए। और आज इंटरनेट हमारे व्यवहार (Behaviour) को समझने और प्रभावित करने लगा है। इसी विचार को IoB (Internet of Behaviour) कहा जाता है। आज हम IoB को विस्तार से समझेंगे। इस आर्टिकल में आप IoB की परिभाषा, कार्यप्रणाली, घटक, उपयोग, फायदे, नुकसान, भविष्य और SEOAI के साथ इसके संबंध को गहराई से समझेंगे।

Table of Contents

IoB (Internet of Behaviour) क्या है?

इंटरनेट ऑफ बिहेवियर (IoB) एक आधुनिक तकनीकी अवधारणा है। जिसमें यूज़र्स के Digital Behaviour से प्राप्त Data का विश्लेषण किया जाता है। और उनके निर्णयों, आदतों और प्रतिक्रियाओं को समझा और प्रभावित किया जाता है।

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सरल शब्दों में, हम ऑनलाइन क्या सर्च करते हैं? किस पोस्ट पर रुकते हैं? क्या खरीदते हैं? कितनी देर वीडियो देखते हैं? यह सब Data बन चुका है। और IoB इसी डेटा का उपयोग करके इंसान के व्यवहार को समझने, भविष्यवाणी करने और दिशा देने की तकनीक है।

यह तकनीक IoT, AI, Big Data और Machine Learning का उपयोग करके यह समझती है कि इंसान कब, क्यों और कैसे कोई निर्णय लेता है। एक लाइन में IoB = User Behaviour + Data + AI + Analytics है।

IoB कैसे अलग है IoT से?

अक्सर लोग IoB को IoT (Internet of Things) से भ्रमित कर देते हैं। जबकि दोनों का उद्देश्य अलग है। आइए, IoT vs IoB के अंतर को संक्षेप में समझते हैं :-

बिंदुIoTIoB
फोकसडिवाइसइंसान का व्यवहार
डेटासेंसर डेटाव्यवहारिक डेटा
उद्देश्यऑटोमेशनBehaviour Influence
उदाहरणस्मार्ट ACपर्सनलाइज्ड ऑफर

संक्षेप में, IoT बताता है कि क्या हुआ? जबकि IoB बताता है कि क्यों हुआ? और आगे क्या होगा?

IoB का इतिहास और विकास

इंटरनेट ऑफ बिहेवियर (IoB) के इतिहास और विकास (Evolution of IoB) निम्न चरणों में समझा जा सकता है :-

1. इंटरनेट और डिजिटल डेटा का प्रारंभ (1990–2005)

इस दौर में इंटरनेट, वेबसाइट्स और ई-मेल का विस्तार हुआ। यूज़र के ऑनलाइन व्यवहार से जुड़ा सीमित डेटा (जैसे पेज विज़िट, क्लिक) एकत्र होने लगा। लेकिन इसका उपयोग केवल Basic Analytics तक ही सीमित था।

2. सोशल मीडिया और मोबाइल युग (2006–2014)

इस दौर में Social Media और Smartphone का आगमन हुआ। जिससे यूज़र बिहेवियर डेटा में भारी वृद्धि हुई। और यहीं से बिहेवियर-आधारित एनालिसिस की नींव मजबूत हुई।

3. IoT और Big Data का विस्तार (2015–2019)

इस दौर में स्मार्ट डिवाइसेज़, वेयरेबल्स और IoT सिस्टम्स का विकास हुआ। जिन्होंने रियल-टाइम बिहेवियर डेटा पैदा किया। साथ ही Big Data और Advanced Analytics की मदद से कंपनियाँ यह समझने लगीं कि यूज़र कब, कैसे और क्यों निर्णय लेता है। यह चरण IoB की तकनीकी आधारशिला बना।

4. IoB शब्द की औपचारिक पहचान (2020)

वर्ष 2020 में Gartner ने “Internet of Behaviour” को अपनी Top Strategic Technology Trends में शामिल किया। यहीं से IoB को एक स्वतंत्र और परिभाषित कॉन्सेप्ट के रूप में वैश्विक पहचान मिली।

5. AI-आधारित और प्रिडिक्टिव IoB (2021–वर्तमान)

वर्तमान में AI, Machine Learning और Behavioral Science की मदद से IoB का तेजी से विकास हो रहा है। अब IoB केवल व्यवहार ट्रैक नहीं करता, बल्कि भविष्यवाणी करता है। और निर्णय लेने में मदद करता है।

संक्षेप में, IoB का इतिहास इंटरनेट डेटा से शुरू होकर आज ह्यूमन-सेंट्रिक, प्रिडिक्टिव और इंटेलिजेंट सिस्टम्स तक पहुँच चुका है।

IoB कैसे काम करता है?

अब सवाल यह है कि IoB काम कैसे करता है? How IoB Works? तो असल में IoB एक स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया पर काम करता है। आइए, इसकी कार्यप्रणाली (Working of IoB) स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं :-

1. Behavioural Data Collection

IoB की कार्यप्रणाली का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है डेटा संग्रह। इस चरण में यूज़र के डिजिटल और फिजिकल दोनों प्रकार के व्यवहार से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाता है। इसमें यह रिकॉर्ड किया जाता है कि यूज़र क्या करता है? कब करता है? कैसे करता है? और कितनी बार करता है?

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डेटा के मुख्य स्रोत ये होते हैं :-

  • मोबाइल ऐप्स (क्लिक, स्क्रॉल, ऐप ओपन टाइम)
  • वेबसाइट्स (पेज व्यू, बाउंस रेट, समय)
  • सोशल मीडिया (लाइक, शेयर, कमेंट)
  • स्मार्ट डिवाइस और Wearables (लोकेशन, हार्ट रेट, एक्टिविटी)

यह डेटा कच्चा (Raw Data) होता है, जिसे सीधे निर्णय के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

2. Data Integration & Storage

विभिन्न स्रोतों से आया डेटा अलग-अलग फॉर्मेट में होता है। इसीलिए IoB System इस डेटा को एकीकृत (Integrate) करता है। ताकि एक ही यूज़र का पूरा व्यवहारिक प्रोफाइल बनाया जा सके।

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इस चरण में Big Data Platforms का उपयोग होता है। और डेटा को Cloud Storage में सुरक्षित रखा जाता है। साथ ही Duplicate और Unnecessary डेटा को हटाया जाता है। यहाँ उद्देश्य होता है सटीक, संरचित और उपयोगी डेटा तैयार करना।

3. Data Processing & Pattern Recognition

अब IoB सिस्टम इस डेटा को Process करता है। और डेटा में मौजूद Pattern ढूंढता है। यहाँ AI और Machine Learning Algorithms का उपयोग किया जाता है। जो यह पहचानते हैं कि यूज़र के व्यवहार में कोई पैटर्न, आदत या ट्रेंड मौजूद है या नहीं।

उदाहरण के लिए:

  • यूज़र हर रात 10 बजे ऑनलाइन खाना ऑर्डर करता है।
  • किसी खास रंग या कीमत पर ज्यादा क्लिक करता है।
  • किसी प्रकार के Content पर ज्यादा समय बिताता है।

इस चरण में सिस्टम यह समझने लगता है कि यूज़र कैसे सोचता है। यानि कि यूजर के व्यवहार (Behaviour) को पहचानने लगता है।

4. व्यवहार विश्लेषण (Behaviour Analysis)

इस चरण में Behaviour Analysis यानि कि यूजर के व्यवहार का गहराई से विश्लेषण किया जाता है। इसमें Behavioural Psychology को भी शामिल किया जाता है। ताकि सिर्फ “क्या” नहीं, बल्कि “क्यों” समझा जा सके। यह विश्लेषण बताता है कि –

  • यूज़र किस चीज़ से प्रभावित होता है?
  • निर्णय लेने में कितना समय लेता है?
  • भावनात्मक प्रतिक्रिया कैसी होती है?

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यह IoB की कार्यप्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। जो इसे सामान्य एनालिटिक्स से अलग और खास बनाता है।

5. Behaviour Prediction करना

असल में IoB की असली ताकत इसी चरण में दिखाई देती है। AI Model पिछले और वर्तमान व्यवहार के आधार पर भविष्य के व्यवहार की भविष्यवाणी करते हैं। जैसे कि –

  • यूज़र आगे क्या खरीदेगा?
  • किस नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देगा?
  • कौन-सा ऑफर स्वीकार करेगा?

यह भविष्यवाणी कंपनियों के लिए बेहद जरूरी होती है। क्योंकि यह उनको पहले से तैयार रहने का मौका देती है।

6. Behaviour Influence या Intervention

अंतिम चरण में IoB सिस्टम यूज़र के व्यवहार को प्रभावित या मार्गदर्शित करता है। यह प्रभाव ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि स्मार्ट और पर्सनलाइज्ड तरीके से होता है। और यूजर को इसका कोई अंदाजा नहीं होता।

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उदाहरण के लिए:

  • सही समय पर डिस्काउंट ऑफर।
  • हेल्थ ऐप में एक्टिविटी रिमाइंडर।
  • एजुकेशन ऐप में मोटिवेशन नोटिफिकेशन।

यहाँ Intervention का लक्ष्य जबरन हस्तक्षेप करना नहीं होता। बल्कि यूज़र और सिस्टम दोनों के लिए बेहतर परिणाम होता है।

IoB की मुख्य तकनीकें

आपको बता दूँ कि IoB कोई एकल तकनीक नहीं है। बल्कि यह कई उन्नत तकनीकों का संगठित इकोसिस्टम है। इन तकनीकों का उद्देश्य केवल डेटा इकट्ठा करना नहीं है। बल्कि मानव व्यवहार को समझना, विश्लेषण करना और प्रभावित करना है। आइए! इन तकनीकों (Technologies of IoB) को विस्तार से समझते हैं।

1. Internet of Things (IoT)

दरअसल IoB की सफलता में IoT की बहुत बड़ी भूमिका है। बल्कि मैं तो यह कहूँगा कि IoT, IoB की आधारशिला है। क्योंकि IoT Devices जैसे कि स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, स्मार्ट होम डिवाइस और सेंसर मानव गतिविधियों से संबंधित Real-Time Data प्रदान करते हैं। ये डिवाइसेज बताते हैं कि –

  • व्यक्ति कहाँ है?
  • क्या कर रहा है?
  • कोई कॉन्टेंट कितनी बार देखा?
  • और कितनी देर तक देखा?

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यह डेटा IoB के लिए Raw Behavioural Input का काम करता है।

उदाहरण:

  • स्मार्टवॉच से हार्ट रेट और नींद का डेटा।
  • स्मार्ट मीटर से बिजली उपयोग की आदत।
  • GPS से लोकेशन मूवमेंट पैटर्न।

यह Data IoB System के लिए बहुत ही उपयोगी होता है। क्योंकि इससे आईओबी सिस्टम व्यक्ति की जीवनशैली और आदतों को समझ पाता है।

2. Big Data Technology

अब आप पूछेंगे कि बिग डेटा (Big Data) क्यों जरूरी है? तो असल में IoB में डेटा की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाखों यूज़र्स और अरबों Interactions होते हैं। इसीलिए Big Data इस विशाल, विविध और तेज़ी से बदलते डेटा को स्टोर, मैनेज और प्रोसेस करने में मदद करता है।

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अगर आप टेकसेवी के नियमित पाठक हैं! तो आपको याद होगा कि Big Data वाले आर्टिकल में मैंने 3 Vs of Big Data के बारे में बात थी। जो कि निम्नलिखित हैं :-

  1. Volume – बहुत अधिक डेटा
  2. Velocity – तेज़ डेटा फ्लो
  3. Variety – अलग-अलग प्रकार का डेटा

Big Data प्लेटफॉर्म:

  • व्यवहारिक इतिहास सुरक्षित रखते हैं।
  • लंबे समय के ट्रेंड पहचानते हैं।
  • Real-Time Analysis संभव बनाते हैं।

इसीलिए IoB में बिग डेटा का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। क्योंकि इसके बिना IoB Scalable नहीं हो सकता।

3. Artificial Intelligence (AI)

अगर IoT आँखें हैं, तो AI (Artificial Intelligence), IoB का दिमाग है। AI डेटा को केवल पढ़ता नहीं है। बल्कि समझता है, निष्कर्ष निकालता है और निर्णय भी लेता है।

IoB में उपयोगी AI तकनीकें:

  • Natural Language Processing (NLP)
  • Computer Vision
  • Decision-Making Algorithms

इसके अलावा व्यवहार विश्लेषण (Behavioral Analysis) में AI यह पहचानता है :-

  • यूज़र की पसंद-नापसंद।
  • भावनात्मक प्रतिक्रिया।
  • निर्णय लेने की प्रवृत्ति।

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शायद अब आप समझ गए होंगे कि AI को IoB का दिमाग क्यों कहते हैं। असल में, AI के कारण ही IoB सिस्टम मानव-जैसी सोच प्रदर्शित कर पात है।

4. Machine Learning (ML)

मशीन लर्निंग (Machine Learning), AI का वह हिस्सा है, जो सिस्टम को अनुभव से सीखने की क्षमता देता है। जितना ज्यादा डेटा, उतनी बेहतर भविष्यवाणी। असल में Machine Learning Models :

  • यूज़र के पिछले व्यवहार से सीखते हैं।
  • भविष्य की आदतों का अनुमान लगाते हैं।
  • समय के साथ खुद को बेहतर बनाते हैं।

उदाहरण:

  • OTT प्लेटफॉर्म पर कॉन्टेंट रिकमेंडेशन।
  • E-commerce में अगली खरीद की भविष्यवाणी।
  • Health App में बीमारी का रिस्क अनुमान।

आपको बताना चाहूँगा कि मशीन लर्निंग ही वह तकनीकी है। जो IoB को Self-Improving System बनाता है।

5. Behavioural Analytics

पहले यह समझते हैं कि Behavioural Analytics क्या है? दरअसल Behavioural Analytics वह तकनीक है, जो यह समझती है कि यूज़र ने क्या किया और क्यों किया? यह सामान्य एनालिटिक्स से आगे जाकर यूज़र की आदतें, प्रतिक्रिया पैटर्न और निर्णय प्रक्रिया को विश्लेषित करती है।

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लेकिन सवाल यह है कि इसका IoB में क्या महत्व है? तो आपको बता दूँ कि Behavioural Analytics के बिना IoB सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा। असल में यही वह तकनीक है, जो मानव मनोविज्ञान को टेक्नोलॉजी से जोड़ती है।

6. Behavioural Psychology

व्यावहारिक मनोविज्ञान IoB का एक महत्वपूर्ण अंग है। असल में, IoB का आधार केवल टेक्नोलॉजी नहीं है। बल्कि मानव व्यवहार विज्ञान है। Behavioural Psychology यह बताती है कि एक इंसान –

  • कैसे निर्णय लेता है?
  • किस चीज़ से प्रभावित होता है?
  • आदतें कैसे बनती और बदलती हैं?

व्यावहारिक उपयोग:

  • Nudging Techniques
  • Reward Systems
  • Habit Formation

इंटरनेट ऑफ बिहेवियर में Behaviour Influence नैतिक और प्रभावी होना चाहिए। और यह सुनिश्चित करना Behavioral Psychology की जिम्मेदारी है।

7. Cloud Computing

यह इंटरनेट ऑफ बिहेवियर (IoB) का एक महत्वपूर्ण Component है। क्योंकि IoB सिस्टम को High Storage, High Processing Power और Scalability की जरूरत पड़ती है। जो कि Cloud  Computing ही प्रदान करता है।

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IoB में Cloud प्लेटफॉर्म:

  • डेटा को कहीं से भी एक्सेस करने देते हैं।
  • Real-Time Analysis संभव बनाते हैं।
  • और लागत कम करते हैं।

8. Natural Language Processing (NLP)

अब आप पूछेंगे कि IoB में NLP (Natural Language Processing) का क्या योगदान है? तो आपको बताना चाहूँगा कि NLP मशीन को इंसानी भाषा समझने में सक्षम बनाता है। इसीलिए Natural Language Processing की मदद से – 

  • सोशल मीडिया पोस्ट,
  • चैट, और 
  • वॉइस कमांड

के जरिए यूजर की भावनात्मक स्थिति और इरादे समझे जाते हैं। और यह Internet of Behaviour (IoB) का सबसे महत्वपूर्ण फीचर है।

9. Predictive Analytics

प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स का मतलब है – भविष्य की झलक। असल में Predictive Analytics, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ML (मशीन लर्निंग) की मदद से यह अनुमान लगाता है कि –

  • यूज़र आगे क्या करेगा?
  • कब करेगा?
  • क्यों करेगा?

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यह IoB का सबसे महत्वपूर्ण फीचर है। क्योंकि यह इंटरनेट ऑफ बिहेवियर (IoB) को Proactive System बनाता है।

10. Security & Privacy Technologies 

सुरक्षा हर ऑनलाइन सिस्टम का सबसे जरूरी और अनिवार्य अंग है? और चूंकि IoB बेहद संवेदनशील व्यवहारिक डेटा पर काम करता है। इसलिए सुरक्षा तकनीकें अनिवार्य हैं।

मुख्य सुरक्षा तकनीकें:

  • Data Encryption
  • Anonymization
  • Access Control
  • Compliance (GDPR, etc.)

डेटा सिक्योरिटी और गोपनीयता IoB के सबसे महत्वपूर्ण Components हैं। क्योंकि इनके बिना IoB खतरनाक हो सकता है।

IoB के प्रमुख उपयोग

अब बात करते हैं IoB के प्रमुख उपयोगों (Uses of IoB) के बारे में। तो आपको बता दूँ कि आज लगभग हर क्षेत्र में IoB का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। आइए, इसके कुछ रियल-लाईफ उदाहरण (Applications of Internet of Behaviour) देखते हैं।

1. डिजिटल मार्केटिंग और विज्ञापन

IoB का सबसे बड़ा और प्रभावी उपयोग Digital Marketing में होता है। क्योंकि IoB Technology यूज़र के ऑनलाइन व्यवहार जैसे कि कौन-सी वेबसाइट देखी? कितना समय बिताया? किस प्रोडक्ट पर क्लिक किया? प्रोडक्ट खरीदा या नहीं? इन सभी डेटा को एकत्र करके उसका विश्लेषण करती है। जिससे कंपनियाँ यह समझ पाती हैं कि यूज़र वास्तव में क्या चाहता है।

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इस Behavioral Data के आधार पर यूजर्स को Personalized Ads दिखाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूज़र बार-बार मोबाइल फोन से जुड़े वीडियो देख रहा है। तो उसे स्मार्टफोन ऑफर्स या एक्सेसरीज़ के विज्ञापन दिखाए जाएंगे। इससे विज्ञापन अधिक प्रासंगिक बनते हैं। और Conversion Rate काफी बढ़ जाता है।

2. ई-कॉमर्स और ग्राहक अनुभव

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (Amazon, Flipkart आदि) IoB का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। IoB यूज़र की ब्राउज़िंग हिस्ट्री, सर्च पैटर्न, खरीदारी की आदतें और रिव्यू पढ़ने के व्यवहार का अध्ययन करता है। और इसके आधार पर प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि यूज़र को कौन-से प्रोडक्ट सुझाने चाहिए।

इससे Customer Experience बेहतर होता है। और ग्राहक सोचता है कि वेबसाइट उसकी पसंद को “समझती” है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति फिटनेस से जुड़े प्रोडक्ट्स देखता है। तो उसे प्रोटीन सप्लीमेंट, स्मार्टवॉच या जिम एक्सेसरीज़ के सुझाव मिलते हैं। इससे Customer Satisfaction और Brand Loyalty दोनों बढ़ती हैं।

3. हेल्थकेयर और फिटनेस मॉनिटरिंग

आजकल IoB का उपयोग हेल्थकेयर सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड और हेल्थ ऐप्स यूज़र के चलने-फिरने, हार्ट रेट, नींद, कैलोरी बर्न और एक्सरसाइज़ पैटर्न जैसे व्यवहारिक डेटा को रिकॉर्ड करते हैं। और IoB इन डेटा का विश्लेषण कर व्यक्ति की सेहत से जुड़े निष्कर्ष निकालता है।

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उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है। तो सिस्टम उसे वॉक करने या एक्सरसाइज़ का रिमाइंडर भेज सकता है। भविष्य में IoB डॉक्टरों को यह अनुमान लगाने में भी मदद कर सकता है कि किसी व्यक्ति को कौन-सी बीमारी होने का खतरा है? जिससे Preventive Healthcare संभव हो सके।

4. स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक मैनेजमेंट

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में IoB महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रैफिक कैमरे, GPS, मोबाइल डेटा और सेंसर यह रिकॉर्ड करते हैं कि लोग किस समय, किस रास्ते और किस साधन से यात्रा करते हैं। IoB इन व्यवहारों का विश्लेषण करके ट्रैफिक पैटर्न को समझता है।

इस डेटा के आधार पर ट्रैफिक सिग्नल ऑटोमैटिक रूप से नियंत्रित किए जा सकते हैं। जिससे जाम कम होता है। उदाहरण के लिए, ऑफिस टाइम में भीड़ वाले रास्तों पर ग्रीन सिग्नल का समय बढ़ाया जा सकता है। इससे न सिर्फ ईंधन और समय की बचत होती है। बल्कि और प्रदूषण में भी कमी आती है।

5. शिक्षा और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म

IoB का उपयोग ऑनलाइन शिक्षा में भी हो रहा है। ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म यह ट्रैक करते हैं कि छात्र कौन-सा वीडियो पूरा देख रहा है? किस टॉपिक पर ज्यादा समय लगा रहा है? और कहाँ बार-बार रुक रहा है? यह सब व्यवहारिक डेटा IoB के अंतर्गत आता है।

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इसके आधार पर प्लेटफॉर्म छात्रों को Personalized Learning Content प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र गणित के किसी चैप्टर में बार-बार गलती कर रहा है। तो उसे उसी टॉपिक से जुड़े अतिरिक्त वीडियो या Practice Questions दिए जाते हैं।

6. फाइनेंस और बैंकिंग सेक्टर

बैंक और फाइनेंशियल संस्थान IoB का उपयोग करते हैं। मुख्य रूप से Fraud  Detection और Risk Analysis के लिए। यदि कोई व्यक्ति अचानक अपने सामान्य व्यवहार से अलग Transaction करता है। जैसे कि असामान्य लोकेशन से बड़ी रकम निकालना। तो IoB सिस्टम इसे संदिग्ध मान सकता है।

इसके अलावा, ग्राहक के खर्च करने की आदतों के आधार पर बैंक उसे सही क्रेडिट कार्ड, लोन या इन्वेस्टमेंट प्लान सुझा सकते हैं। इससे ग्राहक को बेहतर वित्तीय निर्णय लेने में मदद मिलती है। और बैंक के लिए जोखिम कम होता है।

7. कार्यस्थल और कर्मचारी उत्पादकता

आजकल Corporate Sector में भी IoB का उपयोग किया जाता है। जिससे कर्मचारी व्यवहार और उत्पादकता को समझने में मदद मिलती है। ऑफिस सिस्टम यह देख सकते हैं कि कर्मचारी किन टूल्स का अधिक उपयोग कर रहे हैं? किस समय सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं? और कब ब्रेक लेते हैं?

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इस डेटा से कंपनियाँ बेहतर Work Culture बना सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि डेटा दिखाता है कि कर्मचारी दोपहर के बाद कम उत्पादक होते हैं। तो उस समय मीटिंग कम रखी जा सकती है। इससे कर्मचारी संतुष्ट रहते हैं। और आउटपुट बढ़ता है।

8. साइबर सिक्योरिटी और यूज़र बिहेवियर एनालिसिस

इंटरनेट ऑफ बिहेवियर (IoB) Cyber Security में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिस्टम यह पहचान सकता है कि किसी यूज़र का लॉग-इन पैटर्न, टाइपिंग स्पीड या ब्राउज़िंग स्टाइल सामान्य है या नहीं। यदि व्यवहार अचानक बदलता है, तो सिस्टम अलर्ट जारी कर सकता है।

इससे हैकिंग, अकाउंट टेकओवर और डेटा चोरी जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है। बड़े संगठनों में यह तकनीक Digital Security को काफी मजबूत बनाती है।

IoB के फायदे

अब बात करते हैं IoB के फायदों की। तो असल में Internet of Behaviour के बहुत-से फायदे हैं। आइए, इसके फायदों (Advantages of IoB) को संक्षेप में समझते हैं।

  1. व्यक्तिगत अनुभव (Personalization): यूज़र के व्यवहार के आधार पर कस्टम कंटेंट, विज्ञापन और सेवाएँ मिलती हैं।
  2. बेहतर निर्णय लेने में मदद: डेटा-आधारित इनसाइट्स से बिज़नेस और सरकार बेहतर फैसले ले पाते हैं।
  3. ग्राहक अनुभव में सुधार: यूज़र की जरूरतें पहले से समझकर सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाई जाती है।
  4. स्वास्थ्य निगरानी में सहायक: फिटनेस ट्रैकर और हेल्थ ऐप्स से व्यवहार आधारित हेल्थ एनालिसिस संभव होता है।
  5. स्मार्ट मार्केटिंग: सही समय पर सही व्यक्ति तक सही विज्ञापन पहुँचता है।
  6. जोखिम प्रबंधन: फ्रॉड डिटेक्शन और असामान्य व्यवहार की पहचान आसान होती है।
  7. उत्पाद और सेवाओं में सुधार: यूज़र फीडबैक और व्यवहार से बेहतर प्रोडक्ट डिज़ाइन संभव होता है।

IoB के नुकसान

फायदों के साथ-साथ IoB (Internet of Behaviour) के कुछ नुकसान भी हैं। आइए, इन नुकसानों (Disadvantages of IoB) पर भी एक नजर डाल लेते हैं।

  1. गोपनीयता का उल्लंघन (Privacy Risk): अत्यधिक डेटा कलेक्शन से यूज़र की निजता खतरे में पड़ सकती है।
  2. डेटा सुरक्षा जोखिम: साइबर अटैक और डेटा लीक की संभावना बढ़ जाती है।
  3. निगरानी (Surveillance) का खतरा: लगातार ट्रैकिंग से यूज़र असहज महसूस कर सकता है।
  4. व्यवहार में हेरफेर (Behavior Manipulation): लोगों के निर्णयों को प्रभावित या नियंत्रित किया जा सकता है।
  5. डेटा का गलत उपयोग: एकत्र किए गए डेटा का अनैतिक या व्यावसायिक दुरुपयोग हो सकता है।
  6. डिजिटल असमानता: टेक्नोलॉजी तक सीमित पहुँच रखने वाले लोग पीछे रह सकते हैं।
  7. नैतिक और कानूनी चुनौतियाँ: डेटा उपयोग से जुड़े कानून और एथिक्स जटिल हो जाते हैं।

IoB और SEO का संबंध

इंटरनेट ऑफ बिहेवियर, SEO को पूरी तरह बदल रहा है। यह SEO को Keyword-Centric सोच से User-Centric रणनीति की ओर ले जा रहा है। पहले SEO में मुख्य ध्यान इस बात पर होता था कि कौन-सा कीवर्ड कितनी बार इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब सर्च इंजन यूज़र के व्यवहार संकेतों को ज्यादा महत्व देते हैं। जैसे कि –

  • क्लिक करने की आदत
  • पेज पर बिताया गया समय
  • स्क्रॉल डेप्थ, और
  • बार-बार लौटकर आने की प्रवृत्ति

इन व्यवहारों का विश्लेषण करके IoB यह समझता है कि यूज़र वास्तव में क्या चाहता है? जिससे Content को Search Intent के अनुसार बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके। क्योंकि अब Keywords ही नहीं, बल्कि User Behaviour भी एक अहम Ranking Factor बन चुका है। इसीलिए Content ऐसा होना चाहिए, जो – 

  • यूज़र के Behaviour को समझे।
  • User Intent को पूरा करे।
  • Long-Term Engagement बनाए।

आपको बता दूँ कि IoB आधारित कॉन्टेंट ज्यादा Featured Snippets और SGE Results में दिखता है। यानि कि IoB SEO को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

IoB का भविष्य

अब सवाल आता है Internet of Behaviour के भविष्य का। यानि कि Future of IoB कैसा होगा? तो आने वाले समय में IoB + Web 4.0 का समन्वय होगा। जिससे Emotion-Based Internet और Predictive Digital World का निर्माण होगा। यानि कि भविष्य में इंटरनेट हमसे पहले सोचने लगेगा।

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असल में, IoB (Internet of Behaviour) का भविष्य Data, AI और Automation के गहरे एकीकरण से आकार लेगा। और जैसे-जैसे स्मार्ट डिवाइसेज़, वेयरेबल्स, मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बढ़ते जाएंगे। वैसे-वैसे मानव व्यवहार से जुड़ा रियल-टाइम डेटा भी तेज़ी से बढ़ेगा।

आने वाले समय में IoB सिर्फ यह नहीं बताएगा कि यूज़र ने क्या किया? बल्कि यह भी अनुमान लगाएगा कि वह आगे क्या करने वाला है। AI और Machine Learning की मदद से बिज़नेस, मार्केटिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में व्यवहार-आधारित निर्णय और भी सटीक व प्रभावी बनेंगे।

IoB : निष्कर्ष

कुल मिलाकर IoB आधुनिक डिजिटल युग की एक क्रांतिकारी तकनीक बन चुकी है। जो Data, Technology और Human Behavior को आपस में जोड़ता है। और हमें बेहतर सेवाएँ, पर्सनलाइज्ड अनुभव और स्मार्ट निर्णय देता है। आज IoB के माध्यम से बिज़नेस, मार्केटिंग, गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म अधिक सटीक, यूज़र-केंद्रित और परिणाम-उन्मुख निर्णय ले पा रहे हैं।

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लेकिन साथ ही नैतिकता और गोपनीयता की जिम्मेदारी भी लाता है। अगर Behavioral Data का उपयोग पारदर्शिता, प्राइवेसी और एथिकल सीमाओं के भीतर किया जाए! तो IoB समाज और टेक्नोलॉजी के बीच एक सकारात्मक सेतु बन सकता है। और बिज़नेस, समाज और मानव जीवन को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकता है।

IoB (Internet of Behaviour) : FAQs

1. IoB (Internet of Behaviour) क्या है?

उत्तर: IoB एक ऐसी अवधारणा है जिसमें डिजिटल डेटा का उपयोग करके यूज़र के व्यवहार को समझा, विश्लेषित किया और भविष्यवाणी की जाती है।

2. IoB और IoT में क्या अंतर है?

उत्तर: IoT डिवाइस और सेंसर से डेटा इकट्ठा करता है। जबकि IoB उसी डेटा से मानव व्यवहार को समझने पर फोकस करता है।

3. IoB कैसे काम करता है?

उत्तर: IoB यूज़र के क्लिक, सर्च, लोकेशन, ऐप उपयोग और इंटरैक्शन जैसे डेटा को AI और एनालिटिक्स से प्रोसेस करता है।

4. IoB का उपयोग किन क्षेत्रों में होता है?

उत्तर: मार्केटिंग, SEO, हेल्थकेयर, फाइनेंस, स्मार्ट सिटी, ई-गवर्नेंस और एजुकेशन में IoB का व्यापक उपयोग होता है।

5. IoB SEO को कैसे प्रभावित करता है?

उत्तर: IoB यूज़र इंटेंट और एंगेजमेंट को समझकर कॉन्टेंट को बेहतर बनाता है। जिससे रैंकिंग और कन्वर्ज़न बढ़ते हैं।

6. क्या IoB से प्राइवेसी को खतरा है?

उत्तर: हाँ, यदि डेटा का दुरुपयोग हो, तो प्राइवेसी को खतरा हो सकता है।

7. IoB में कौन-सी तकनीकें उपयोग होती हैं?

उत्तर: AI, Machine Learning, Big Data Analytics, IoT और Behavioral Science प्रमुख तकनीकें हैं।

8. IoB का भविष्य कैसा है?

उत्तर: IoB का भविष्य काफी उज्जवल है। क्योंकि भविष्य में यह और अधिक पर्सनलाइज़्ड, प्रिडिक्टिव और ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा।

“IoB (Internet of Behaviour) क्या है? सम्पूर्ण गाइड” पर 6 विचार

    1. हाँ विकास भाई! मैं Blogging में AI का यूज करता हूँ। मैं ज्यादातर टॉपिक रिसर्च, कीवर्ड रिसर्च, कॉन्टेन्ट रिसर्च, पोस्ट ड्राफ्ट के लिए AI का यूज करता हूँ।

    1. विकास भाई! Knowledge & Facts के लिए मैं Research करता हूँ। हर पोस्ट के लिए कम से कम 4-5 दिन Research & Fact Checking में लगते हैं। यही वजह है कि मैं हफ्ते में सिर्फ 1 पोस्ट पब्लिश कर पता हूँ।

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