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Cloud Computing क्या है? इसे कैसे इस्तेमाल करें?

Cloud-Computing-Kya-Hai

आप अपने घर में बिजली का कनेक्शन लेते हैं। और सिर्फ उतना ही पैसा देते हैं, जितनी बिजली इस्तेमाल करते हैं। Cloud Computing भी इसी तरह का एक Concept है। जिसमें आपको Internet के जरिए On-Demand कम्प्यूटर सर्विसेज (जैसे कि सर्वर, स्टोरेज, डेटाबेस आदि) मिलती हैं। और आप सिर्फ उन्हीं Services का पैसा देते हैं, जिन्हें आप इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह क्लाउड कम्प्यूटिंग आखिर है क्या? What is Cloud Computing? और यह काम कैसे करता है? आइए, विस्तार से समझते हैं।

Table of Contents

Cloud Computing

आजकल Cloud Based Services का चलन तेजी-से बढ़ रहा है। क्योंकि ये सस्ती, आसान और 24×7 On-Demand उपलब्ध होती हैं। इसीलिए इन्हें कोई भी, कभी भी और कहीं से भी इस्तेमाल कर सकता है। Cloud Services का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको खुद का Physical Infrastructure नहीं बनाना पड़ता। क्योंकि सारे संसाधन Cloud Service Provider मुहैया करवाता है। आपको तो सिर्फ इस्तेमाल करना होता है।

Cloud Computing क्या है?

क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) एक ऐसी तकनीक है! जिसमें कंप्यूटर, स्टोरेज, सर्वर, डेटाबेस, नेटवर्किंग और सॉफ्टवेयर जैसी IT Services इंटरनेट के माध्यम से Online प्रदान की जाती हैं। और ग्राहक अपनी जरूरत और सहूलियत के हिसाब से जब चाहे, जहां चाहे, इन सर्विसेज को इस्तेमाल कर सकता है।

अगर आसान भाषा में कहें तो जब आप अपने Data और Applications को अपनी Local Hard Drive की बजाय Internet के Server पर Store और Access करते हैं, उसे Cloud Computing कहते हैं।

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चलिए, इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। मान लीजिए कि आपने सभी Documents (Marksheet, Aadhaar Card, PAN Card आदि) Google Drive पर Upload किए। और अब आपको जब भी, जहां भी जरूरत पड़ती है, आप उन्हें Google Drive से Access कर सकते हैं। तो इस केस में आप Cloud Storage का उपयोग कर रहे हैं। जो कि क्लाउड कम्प्यूटिंग की ही एक सर्विस है।

Cloud Computing का इतिहास

क्लाउड कम्प्यूटिंग की शुरुआत 1960 के दशक में Time Sharing System से हुई थी। जिसमें कई उपयोगकर्ता एक ही Computer को शेयर करते थे। यानि अलग-अलग समय पर इस्तेमाल करते थे। लेकिन 1990 के दशक में Internet का आगमन हुआ। और जैसे-जैसे इंटरनेट का विकास हुआ, Service Provider कंपनियों का दौर शुरू हो गया। लेकिन आधुनिक Cloud का जन्म 2000 के दशक में हुआ।

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2002 में Amazon ने अपने अंदरूनी ढांचे को बेहतर बनाया। और 2006 में EC2 और S3 के साथ Amazon Web Services (AWS) की शुरूआत की, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी Web Hosting कंपनी है। उसके बाद तो होड़ लग गई। 2008 में Google App Engine आया। और 2010 में Microsoft Azure की शुरुआत हो गई।

2010 के बाद Cloud के क्षेत्र में जबरदस्त Revolution देखने को मिला। जिसके परिणामस्वरूप हमें कई नई Technologies देखने को मिली। मसलन, Multi-Cloud और Hybrid Strategies. इसी दौरान बिना सर्वर के कम्प्यूटिंग (Serverless Computing) और Container Technologies (जैसे कि Docker और Kubernetes) की शुरुआत हुई। और आज के दिन AI (Artificial Intelligence) और Machine Learning Integration के साथ Cloud Computing और भी पॉवरफुल हो चुकी है।

Cloud Computing कैसे काम करता है?

अब सवाल यह है कि क्लाउड कम्प्यूटिंग काम कैसे करता है? How doest cloud computing work? तो इसकी कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक सरल उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि आपको एक रेस्टोरेंट चलाना है। और आपके सामने दो ऑप्शन्स हैं :-

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पहला, आपको जमीन खरीदनी है या लीज पर लेनी है। और उस पर एक रेस्टोरेंट बनवाना है। फिर अपनी रसोई, बर्तन, फर्नीचर, रॉ मैटीरियल, बिजली, पानी और कर्मचारी – सब कुछ खुद ही मैनेज करना है। कुल मिलाकर, आपको लाखों-करोड़ों रुपये और महीनों का वक्त चाहिए।

दूसरा, आप एक साझा व्यावसायिक रसोईघर किराए पर लेते हैं। जहां सारा सामान पहले से है। और आपको अपनी जरूरत के अनुसार कर्मचारी भी मिल जाते हैं। आपको सिर्फ अपने वास्तविक उपयोग के लिए भुगतान करना है, बस! आपको सिर्फ कुछ हजार रूपये की जरूरत है। और आप तुरन्त शुरू कर सकते हैं।

अब आप ही बताइए कि इनमें से कौनसा ऑप्शन ज्यादा Convenient और Cost Effective है? दूसरे वाला ना? Cloud Computing भी इसी तरह काम करता है। यहां आपको सब-कुछ (अर्थात् सारा Infrastructure) पहले से बना-बनाया मिलता है। आपको जो Service चाहिए, और जितनी देर के लिए चाहिए, यूज कीजिए। और भुगतान कीजिए, बस! यही Cloud Computing का Core Principle है।

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क्लाउड कम्प्यूटिंग का तकनीकी ढांचा:

  • सामने का हिस्सा (Front-end): उपयोगकर्ता का माध्यम (Web Browser, Mobile App)
  • पीछे का हिस्सा (Back-end): Cloud Service Provider का ढांचा।
  • नेटवर्क (Network): इंटरनेट कनेक्शन।
  • सेवाएं (Services): विभिन्न Cloud Services (Computing, Storage, Server आदि।)

Cloud Computing के प्रकार

क्लाउड कम्प्यूटिंग के Deployment Models और Service Models के आधार पर अलग-अलग प्रकार हैं। अगर Deployment (तैनाती) के आधार पर देखें, तो क्लाउड कम्प्यूटिंग के 4 मुख्य प्रकार (Types of Cloud Computing) हैं। 

1. Public Cloud (पब्लिक क्लाउड)

यह क्लाउड सेवा प्रदाता द्वारा Internet के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। और इसकी सुरक्षा व मेंटनेंस Cloud Provider द्वारा की जाती है। यह आम जनता के लिए उपलब्ध होती है। और काफी सस्ती होती है। उदाहरण के लिए Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure, Google Cloud Platform (GCP) आदि।

Public Cloud की विशेषताएँ:

  • लागत-प्रभावी: Pay-Per-Use मॉडल के कारण उपयोगकर्ता केवल उतनी सेवाओं का भुगतान करते हैं, जितना वे उपयोग करते हैं।
  • सार्वजनिक पहुंच: कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से इन सेवाओं का उपयोग कर सकता है।
  • प्रबंधन: इन सेवाओं का प्रबंधन क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर (CSP) द्वारा किया जाता है। जैसे कि Amazon, Microsoft, Google आदि।

उपयोग: पब्लिक क्लाउड का उपयोग ज्यादातर छोटे और मध्यम आकार के Businesses और Startups करते हैं। जो इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश नहीं करना चाहते।

2. Private Cloud (प्राइवेट क्लाउड)

प्राइवेट क्लाउड किसी एकल संगठन या कंपनी के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए जाते हैं। इसीलिए ये थोड़े महंगे होते हैं। इन्हें आंतरिक या बाहरी रूप से Host किया जा सकता है। यह Cloud Infrastructure केवल एक विशेष संगठन के लिए समर्पित होता है। उदाहरण के लिए VMware और OpenStack आधारित प्राइवेट क्लाउड।

Private Cloud की विशेषताएँ:

  • उच्च सुरक्षा: Firewall और आंतरिक होस्टिंग के माध्यम से Data की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
  • नियंत्रण: कंपनी या संगठन का Cloud  Resources पर पूर्ण Control होता है।
  • अनुकूलन: संगठन की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित (Optimize) किया जा सकता है

उपयोग: प्राइवेट क्लाउड का उपयोग बड़े संगठन, बैंक और सरकारी विभाग करते हैं। जिनके लिए Data की Security और Privacy सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है।

3. Hybrid Cloud (हाइब्रिड क्लाउड)

हाइब्रिड क्लाउड, Public और Private Cloud का मिश्रण होता है। और यह संगठनों को दोनों Cloud Services के सर्वोत्तम लाभ प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, Google Apps, Microsoft Office 365 और VMware Cloud.

Hybrid Cloud की विशेषताएँ:

  • लचीलापन: संगठन अपने Sensitive और Private Data को प्राइवेट क्लाउड में और Non-Sensitive Data को पब्लिक क्लाउड में संग्रहीत कर सकते हैं।
  • स्केलेबिलिटी: आवश्यकता पड़ने पर High-Performance Requirements वाले ऐप्लिकेशन्स को पब्लिक क्लाउड पर चलाया जा सकता है। और Public Cloud का उपयोग करके संसाधनों का विस्तार किया जा सकता है।

उपयोग: हाईब्रिड क्लाउड का उपयोग ज्यादातर बड़े Enterprises द्वारा किया जाता है, जिनको विभिन्न प्रकार की ज़रूरतें होती हैं। जैसे कि Data Security, Scalability, Cost Effectiveness आदि।

4. Community Cloud (कम्युनिटी क्लाउड)

यह क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एक विशेष समुदाय (जैसे एक ही उद्योग के संगठन) के बीच साझा किया जाता है। जो सामान्य हितों या आवश्यकताओं को पूरा करता है।

Community Cloud की विशेषताएँ:

  • साझा उपयोग: एक से अधिक Organizations इनफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों को साझा करते हैं।
  • सुरक्षा: पब्लिक क्लाउड की तुलना में अधिक सुरक्षित (Secure) होता है।

उपयोग: कम्यूनिटी क्लाउड का उपयोग स्वास्थ्य सेवा संगठनों, बैंकिंग इंडस्ट्री और सरकारी संगठनों में किया जाता है।

Cloud Services के प्रकार

अब बात करते हैं सेवा मॉडल्स की। तो Service Models के आधार पर Cloud Computing के 3 मुख्य प्रकार हैं। और इन्हें अक्सर क्लाउड कंप्यूटिंग का स्तरीय मॉडल (Layered Model) भी कहा जाता है। ये 3 प्रकार (Cloud Computing Types) निम्नलिखित हैं :-

1. IaaS (Infrastructure as a Service)

इन्फ्रास्ट्रक्चर एज ए सर्विस (IaaS) में, क्लाउड प्रदाता आपको भौतिक Server, Network, Storage और Virtualization जैसे बुनियादी संसाधन (Infrastructure) इंटरनेट के माध्यम से किराए पर देता है। आप इस इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऊपर अपना मनचाहा Operating System, Software और Application इंस्टॉल कर चला सकते हैं।

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उदाहरण के लिए मान लीजिए आपको एक नया व्यवसाय शुरू करना है। तो IaaS का उपयोग करके आप बिना अपना सर्वर खरीदे, Amazon या Microsoft से एक Virtual  Server किराए पर ले सकते हैं। और उस पर अपनी Website Host कर सकते हैं।

IaaS की विशेषताएं:

  • नियंत्रण: ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लिकेशन और स्टोरेज पर उपयोगकर्ता का पूरा नियंत्रण होता है।
  • लचीलापन: जरूरत के अनुसार संसाधनों (CPU, RAM, Storage) को घटाया या बढ़ाया जा सकता है।
  • भुगतान मॉडल: “पे-एज-यू-गो” (Pay-as-you-go) मॉडल अपनाया जाता है। इसीलिए आप जितना उपयोग करते हैं, उतना ही भुगतान करते हैं।

मुख्य IaaS प्रदाता (Vendors):

  • Amazon Web Services (AWS) – EC2, S3
  • Microsoft Azure – Virtual Machines, Storage
  • Google Cloud Platform (GCP) – Compute Engine, Cloud Storage
  • DigitalOcean

2. PaaS (Platform as a Service)

प्लेटफॉर्म एज ए सर्विस (PaaS) में, क्लाउड प्रदाता आपको Software Development के लिए एक तैयार Platform प्रदान करता है। इसमें Development Tool, Database, Middleware, और Operating System शामिल होते हैं। डेवलपर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करके एप्लिकेशन बनाकर, टेस्ट और डिप्लॉय कर सकते हैं। वह भी बिना अंतर्निहित इन्फ्रास्ट्रक्चर की चिंता किए।

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उदाहरण के लिए, एक Developer अपना नया मोबाइल ऐप बना रहा है। तो वह Google App Engine का उपयोग कर सकता है। उसे सर्वर सेटअप, नेटवर्क कॉन्फिगरेशन या डेटाबेस मैनेजमेंट की चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह सिर्फ अपनी Coding पर ध्यान दे सकता है।

PaaS की विशेषताएं:

  • उत्पादकता: डेवलपर्स का समय बचता है क्योंकि उन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेज नहीं करना पड़ता।
  • सहयोग: एक ही प्रोजेक्ट पर काम कर रहे multiple डेवलपर्स आसानी से सहयोग कर सकते हैं।
  • स्वचालन: बैकअप, स्केलिंग और सुरक्षा जैसे कार्य स्वचालित रूप से managed होते हैं।

मुख्य PaaS प्रदाता (Vendors):

  • Google App Engine
  • Microsoft Azure App Services
  • Heroku
  • AWS Elastic Beanstalk

3. SaaS (Software as a Service)

सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS) में, क्लाउड प्रदाता इंटरनेट के माध्यम से तैयार Software Application उपलब्ध कराता है। उपयोगकर्ता सॉफ्टवेयर को अपने Computer में Install किए बिना, सिर्फ एक Web Browser (जैसे कि Chrome, Firefox) की मदद से उसका उपयोग कर सकता है।

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उदाहरण के लिए, Gmail, Google Docs, Microsoft 365, Netflix, Salesforce आदि SaaS के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। आप Internet से जुड़कर अपने Web Browser की मदद से बिना कोई Software Install किए इन सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

SaaS की विशेषताएं:

  • सार्वभौमिक पहुंच: उपयोगकर्ता किसी भी डिवाइस (कंप्यूटर, टैबलेट, स्मार्टफोन) और कहीं से भी एप्लिकेशन तक पहुंच सकता है।
  • सदस्यता मॉडल: उपयोगकर्ता आमतौर पर एक Monthly या Yearly सब्सक्रिप्शन फीस देकर सेवा का उपयोग करता है।
  • स्वचालित अद्यतन: सॉफ्टवेयर के सभी अपडेट और रखरखाव का काम सेवा प्रदाता द्वारा किया जाता है।

मुख्य SaaS प्रदाता (Vendors):

  • Google Workspace (Gmail, Docs, Drive)
  • Microsoft 365 (Office Online, Outlook)
  • Salesforce
  • Netflix, Spotify
  • Zoom, Slack

प्रमुख Cloud Service Providers

कहने को तो आज मार्केट में कई सारे क्लाउड सर्विस प्रदाता हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे Cloud Market पर सिर्फ 3 बड़ी कंपनियों का कब्ज़ा है। आइए, जानते हैं कि ये 3 कंपनियां कौन- कौनसी हैं? और Cloud Service Market में इनकी क्या स्थिति है?

1. Amazon Web Services (AWS)

अमेज़न, इस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा Cloud Service Provider है। और यह 31% की बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले पायदान पर है। यानि कि एक तरह से इस मार्केट का नेता है। Amazon AWS की सबसे बड़ी ताकत इसका व्यापक Service Portfolio और Global Presence है। साथ ही परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत समुदायिक सहायता इसकी सबसे बड़ी खूबियां हैं।

Amazon AWS की मुख्य सेवाएं:

  • कम्प्यूटिंग: EC2, Lambda
  • भंडारण: S3, EBS
  • डेटाबेस: RDS, DynamoDB
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता: SageMaker, Rekognition

2. Microsoft Azure

माइक्रोसॉफ्ट, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता Cloud Provider है। जो 25% के साथ करीब से अमेजन का पीछा कर रहा है। Microsoft Azure उद्यम उपकरणों के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाता है। जिससे यह पहले से Microsoft Products का उपयोग कर रहे व्यवसायों के लिए शीर्ष विकल्प बन जाता है।

Microsoft Azure की मुख्य सेवाएं:

  • कम्प्यूटिंग: Virtual Machines, Azure Functions
  • भंडारण: Blob Storage, File Storage
  • डेटाबेस: SQL Database, Cosmos DB
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता: Cognitive Services, Machine Learning

3. Google Cloud Platform (GCP)

गूगल इस मार्केट में तीसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी है! जो Cloud Market में 11% की बाजार हिस्सेदारी रखता है। Google Cloud अपनी AI और Analytics क्षमताओं के लिए जाना जाता है। GCP की सबसे बड़ी ताकत इसका उन्नत डेटा विश्लेषण, Kubernetes (मूल रूप से Google द्वारा विकसित) और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण है।

Google Cloud Platform की मुख्य सेवाएं:

  • कम्प्यूटिंग: Compute Engine, Cloud Functions
  • भंडारण: Cloud Storage, Persistent Disk
  • डेटाबेस: Cloud SQL, Firestore
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता: TensorFlow, AutoML

Cloud Computing के फायदे

वैसे तो क्लाउड कम्प्यूटिंग के बहुत सारे फायदे हैं। लेकिन यहाँ हम सिर्फ मुख्य फ़ायदों (Cloud Computing Benefits) के बारे में बात करेंगे। जो कि निम्नलिखित हैं:-

1. लागत में बचत (Cost-Efficiency)

  • पूंजीगत व्यय में कमी: अपना हार्डवेयर नहीं खरीदना पड़ता।
  • परिचालन व्यय मॉडल: जितना उपयोग करें उतना पैसा दें।
  • सूचना तकनीक कर्मचारियों की कम आवश्यकता: रखरखाव की जरूरत नहीं।
  • ऊर्जा की बचत: बिजली और कूलिंग की लागत बचती है।

2. विस्तार और लचीलापन (Scalability)

  • स्वचालित विस्तार: ट्रैफिक के अनुसार संसाधन अपने आप समायोजित होते हैं।
  • वैश्विक पहुंच: दुनियाभर के Servers तक पहुंच।
  • तुरंत प्रावधान: मिनटों में नए संसाधन।
  • लचीले संसाधन: ऊपर या नीचे विस्तार करना आसान।

3. सुरक्षा और विश्वसनीयता (Reliability)

  • आश्चर्यजनक तथ्य: 94% व्यवसायों ने Cloud पर जाने के बाद अपनी सुरक्षा में सुधार देखा।
  • पेशेवर सुरक्षा टीमें: Cloud प्रदाताओं के पास विशेषज्ञ सुरक्षा टीमें हैं।
  • नियमित अपडेट: स्वचालित सुरक्षा सुधार।
  • आपदा पुनर्प्राप्ति: अंतर्निहित बैकअप और पुनर्प्राप्ति।
  • नियमों का पालन: विभिन्न उद्योग मानकों का अनुपालन।

4. नवाचार और गति (Innovation)

  • नवीनतम तकनीक तक पहुंच: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, IoT सेवाएं आसानी से उपलब्ध।
  • तेज़ तैनाती: विकास से उत्पादन तक तेज़ यात्रा।
  • मुख्य व्यवसाय पर ध्यान: ढांचा प्रबंधन में समय बर्बाद नहीं।
  • सहयोग: टीमें विश्वव्यापी स्तर पर सहयोग कर सकती हैं।

Cloud Computing की चुनौतियां

हालांकि Cloud Computing के बहुत सारे फायदे हैं। लेकिन इसके कुछ नुकसान, सीमाएं और चुनौतियाँ भी हैं। आइए, क्लाउड कम्प्यूटिंग की चुनौतियों पर एक नजर डालते हैं।

1. सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं

  • डेटा का स्थान: आपका डेटा कहां संग्रहीत है?
  • डेटा उल्लंघन: अमेरिका में 37% संगठन पिछले साल ऑडिट में असफल हुए या Cloud Data उल्लंघन का अनुभव किया।
  • अनुपालन के मुद्दे: नियामक आवश्यकताएं।
  • साझा जिम्मेदारी मॉडल: कौन किस सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है?

2. इंटरनेट पर निर्भरता

  • कनेक्टिविटी के मुद्दे: इंटरनेट बंद हो तो सेवा तक पहुंच नहीं।
  • बैंडविथ आवश्यकताएं: भारी एप्लीकेशन के लिए तेज़ इंटरनेट जरूरी।
  • विलंबता की चिंताएं: वास्तविक समय के एप्लीकेशन के लिए समस्या हो सकती है।

3. विक्रेता के जाल में फंसना

  • स्थानांतरण की कठिनाइयां: एक प्रदाता से दूसरे में जाना जटिल।
  • मालिकाना तकनीकें: विशिष्ट उपकरण और प्रारूप।
  • लागत के निहितार्थ: स्थानांतरण लागत बहुत अधिक हो सकती है।

4. लागत प्रबंधन

  • मुख्य चुनौती: Cloud निर्णयकर्ताओं के सामने मुख्य चुनौती Cloud खर्च का प्रबंधन है (82%)
  • अप्रत्याशित लागत: उपयोग आधारित बिलिंग कभी-कभी चौंकाने वाले बिल।
  • छिपे हुए शुल्क: डेटा स्थानांतरण, API कॉल के अलग शुल्क।
  • अधिक प्रावधान: जरूरत से ज्यादा संसाधन बुक करना।

Cloud Computing के उपयोग

क्लाउड कंप्यूटिंग एक बहुमुखी तकनीक है! जिसका उपयोग आज लगभग हर उद्योग और हमारे रोजमर्रा के जीवन में किसी न किसी रूप में हो रहा है। इसके प्रमुख उपयोग (Usage of Cloud Computing) निम्नलिखित हैं:-

1. Data Storage and Backup

यह Cloud Computing का सबसे आम और लोकप्रिय उपयोग है। उपयोगकर्ता और कंपनियाँ अपना डेटा (जैसे Documents, Photos, Videos, Database) क्लाउड पर स्टोर करती हैं। इसका फायदा यह है कि डेटा का Local Hard Drive खराब होने या चोरी होने का डर नहीं रहता। साथ ही Data तक दुनिया में कभी भी, कहीं से भी और किसी भी Device से पहुँचा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, Google Drive, Dropbox, Microsoft OneDrive और iCloud का उपयोग पर्सनल स्टोरेज के लिए करना। और AWS S3, Azure Blob Storage का उपयोग Enterprises द्वारा Backup और Archiving के लिए करना।

2. Big Data Analytics

क्लाउड कंप्यूटिंग बहुत बड़ी मात्रा में डेटा (Big Data) को Store और Process करने की शक्ति प्रदान करता है। पारंपरिक तरीकों से इतने बड़े डेटा का विश्लेषण करना बहुत महंगा और समय लेने वाला होता है। लेकिन क्लाउड पर, एनालिटिक्स के लिए जरूरत के समय हजारों Servers का Cluster खड़ा किया जा सकता है। और काम पूरा होने के बाद बंद किया जा सकता है, जिससे लागत कम हो जाती है।

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उदाहरण के लिए, Customer Behaviour का पैटर्न पहचानना, बाजार के रुझानों का विश्लेषण, Scientific Research, और Fraud Detection हेतु Big Data Analysis के लिए Cloud का उपयोग करना।

3. Disaster Recovery – DR

क्लाउड Disaster Recovery के लिए एक आदर्श और किफायती समाधान प्रदान करता है। पारंपरिक DR Solutions बहुत महंगे होते थे। क्योंकि उनके लिए एक दूसरे Data Centre की जरूरत होती थी। जो आमतौर पर निष्क्रिय (Idle) पड़ा रहता था। क्लाउड पर, आप केवल उसी Storage और Computing  Power के लिए भुगतान करते हैं, जिसका आप वास्तव में उपयोग करते हैं। डेटा अलग-अलग Geographical Locations पर Automatically Replicate हो जाता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का मुख्य Data Centre किसी प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ जाए! तो क्लाउड पर Stored Backup से सेवाओं को कुछ ही मिनटों में दूसरे Location पर Restore किया जा सकता है।

4. Software Development and Testing

डेवलपर्स के लिए क्लाउड एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है। साथ ही डेवलपमेंट और टेस्टिंग के लिए अलग-अलग Environments बनाना आसान है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर नए Server मिनटों में प्राप्त किए जा सकते हैं। और काम खत्म होने पर बंद किए जा सकते हैं। इससे Hardware की लागत बचती है। और टीमों के बीच सहयोग आसान होता है।

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उदाहरण के लिए, GitHub Actions, Jenkins, AWS CodeDeploy जैसे टूल्स का उपयोग करके क्लाउड पर CI/CD (Continuous Integration/Continuous Deployment) पाइपलाइन्स बनाना बहुत आसान है।

5. Web-Based Applications & APIs

आज जितने भी पॉपुलर वेब एप्लिकेशन (जैसे कि Social Media, Streaming Services, eCommerce Websites आदि) हैं, वे सभी क्लाउड पर ही चलते हैं। क्योंकि Cloud इन एप्लिकेशन्स को बिना किसी रुकावट के लाखों-करोड़ों Users को सेवा देने की Scalability प्रदान करता है। साथ ही Traffic के अनुसार Resources ऑटोमैटिकली Scale Up और Scale Down हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, Netflix, Amazon, Spotify और Instagram जैसी सेवाएं पूरी तरह Cloud Infrastructure पर निर्भर हैं। इसीलिए इन प्लेटफॉर्म्स पर भले ही कितना भी ट्राफिक क्योंकि न आ जाए, ये आसानी से हैंडल कर लेते हैं।

6. AI & Machine Learning

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए भारी मात्रा में डेटा और Immense Computing Power (जैसे GPU, TPU) की आवश्यकता होती है। और क्लाउड प्रोवाइडर ये High-Performance Computing Resources On-Demand उपलब्ध कराते हैं। यहां तक कि एक छोटा स्टार्टअप भी बिना महंगा हार्डवेयर खरीदे AI Models को विकसित और Deploy कर सकता है।

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उदाहरण के लिए, चैटबॉट्स, इमेज रिकग्निशन, भाषा अनुवाद और Recommendation Systems (जैसे “आपके लिए सुझाव”) का विकास Cloud पर ही होता है।

7. Internet of Things – IoT

IoT डिवाइस (जैसे स्मार्ट घड़ियाँ, स्मार्ट थर्मोस्टैट, औद्योगिक सेंसर) लगातार डेटा उत्पन्न करते रहते हैं। क्लाउड IoT से आने वाले इस विशाल, Real-Time डेटा को Collect, Store, और Process करने के लिए एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

उदाहरण के लिए, एक Smart City में ट्रैफिक सेंसर से डेटा एकत्र करके यातायात प्रबंधन करना।

8. Containers & Serverless Computing

ये आधुनिक Application Development और Deployment के तरीके हैं। Containers का मतलब है, एप्लिकेशन को एक Portable Unit में पैक करना। ताकि उसे कहीं भी चलाया जा सके। क्लाउड प्रोवाइडर Kubernetes जैसे Container Management Platforms को मैनेज करना आसान बना देते हैं।

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सर्वरलेस कम्प्यूटिंग का अर्थ है, डेवलपर्स सिर्फ अपना Code चलाते हैं। Server को Manage करने की जिम्मेदारी Cloud Provider की होती है। और आप कोड के चलने के Exact समय के हिसाब से भुगतान करते हैं। उदाहरण के लिए, AWS Lambda, Azure Functions और Google Cloud Functions इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं।

Cloud Computing : निष्कर्ष

क्लाउड कंप्यूटिंग ने आधुनिक तकनीकी दुनिया की रूपरेखा ही बदल दी है। इसका उपयोग सिर्फ IT Industry तक सीमित नहीं हैं। बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मनोरंजन, वित्त, और कृषि जैसे हर क्षेत्र में इसकी पहुँच है। यह Innovation को तेज करने, नई सेवाएँ लॉन्च करने और दुनिया भर के उपयोगकर्ताओं तक पहुँचने का मूलभूत आधार बन गया है।

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उम्मीद है, इस आर्टिकल के जरिए आपको Cloud Computing Kya Hai? यह कैसे काम करता है? इसके क्या-क्या उपयोग हैं? क्या-क्या फायदे और नुकसान हैं? इन सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर कीजिए। और ऐसे ही ज्ञानवर्धक आर्टिकल्स के लिए टेकसेवी डॉट इन को सब्सक्राइब कर लीजिए। ताकि जैसे ही नया आर्टिकल पब्लिश हो, आपको नोटिफिकेशन मिल जाए, धन्यवाद।

Cloud Computing: FAQs

1. Cloud Computing क्या है?

उत्तर: Cloud Computing वह तकनीक है, जिसके जरिए इंटरनेट के माध्यम से On-Demand सर्वर, स्टोरेज, डेटाबेस, नेटवर्किंग, सॉफ्टवेयर, एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस जैसी सेवाएँ उपलब्ध करवाई जाती हैं।

2. Cloud Computing के मुख्य प्रकार कौन-कौनसे हैं?

उत्तर: सेवा मॉडल्स के आधार पर मुख्य प्रकार हैं :-
IaaS (Infrastructure as a Service)
PaaS (Platform as a Service)
SaaS (Software as a Service)

3. Cloud Computing के प्रमुख फायदे क्या हैं?

उत्तर: क्लाउड कम्प्यूटिंग के प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं :-
‣ लागत में कमी
‣ स्केलेबिलिटी (Scalability)
‣ उच्च उपलब्धता (High Availability)
‣ Global Accessibility
‣ Automatic Updates

4. क्या Cloud Computing सुरक्षित है?

उत्तर: हाँ, सुरक्षा के लिए Data Encryption, Multi-Factor Authentication और Firewall जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

5. Public Cloud और Private Cloud में क्या अंतर है?

उत्तर: पब्लिक क्लाउड इंटरनेट पर सभी के लिए उपलब्ध होता है। जबकि प्राइवेट क्लाउड सिर्फ एक संगठन या कंपनी के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

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